[बास पाठ] स्लैप तकनीक सुधारने के अभ्यास के तरीके और स्लैप बास का उत्पत्ति एवं इतिहास / वर्ल्ड यूनिफाइड म्यूजिक सर्टिफिकेशन

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आज हम न केवल स्लैप बास तकनीक को सुधारने के तरीके और व्यावहारिक अभ्यास को पेश करेंगे, बल्कि स्लैप बास के निर्माण के पीछे के इतिहास के बारे में भी बताएंगे। स्लैप बास एक तकनीक है जिसमें थम्पिंग (अंगूठे से स्ट्रिंग को मारकर एक मजबूत, तालबद्ध हमला उत्पन्न करना) और पॉपिंग (सूचक या मध्य अंगुली से स्ट्रिंग को खींचकर फ्रेस्टबोर्ड से टकराना और तालबद्ध ध्वनि उत्पन्न करना) को मिलाया जाता है। यह तकनीक फ़ंक, रॉक और फ्यूज़न संगीत में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है, और एक रिदमिक और शक्तिशाली ग्रूव उत्पन्न करती है।

स्लैप बास में महारत हासिल करने के लिए, अपने बुनियादी स्वरूप को मजबूत करना और साथ ही लय और फ्रेज़िंग की अच्छी समझ विकसित करना आवश्यक है। इस लेख में, हम सब कुछ विस्तार से समझाएंगे — शुरुआती मूल बातें से लेकर उन्नत तकनीक और कुशल अभ्यास विधियों तक।

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1. स्लैप बास का बुनियादी स्वरूप मजबूत करना

① बास पकड़ना

चूंकि स्लैप में दाहिने हाथ की बड़ी गति की आवश्यकता होती है, इसलिए बास पकड़ने का तरीका महत्वपूर्ण है।

  • बास की स्थिति: यदि बास बहुत नीचे बैठता है, तो यह कलाई में तनाव डाल सकता है। इसे सामान्य से थोड़ा ऊँचा समायोजित करें।

  • स्ट्रैप समायोजन: बैठने और खड़े होने के बीच स्थिति में बड़ा बदलाव न होने दें।

② दाहिने हाथ की स्थिति

स्थिर स्लैप ध्वनि के लिए उचित दाहिने हाथ की स्थिति आवश्यक है।

  • अंगूठे की स्थिति: अंगूठे को नेक की ओर, लगभग फ्रंट पिकअप के पास रखें।

  • कलाई का कोण: कलाई को हल्का मोड़ा और आरामदायक रखें।

  • हाथ की गति: स्ट्राइक करते समय केवल अंगुली की गति नहीं, बल्कि कलाई की हल्की घूर्णन का उपयोग करें।

③ बाएं हाथ का स्वरूप

अवांछित ध्वनि रोकने के लिए बाएं हाथ से उपयोग नहीं की जाने वाली स्ट्रिंग्स को म्यूट करें।

  • अंगूठे की स्थिति: क्लासिक स्वरूप में अंगूठा नेक के पीछे केंद्र में हल्का टिकता है। कुछ फ्रेज़ में “रॉक ग्रिप” का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें अंगूठा नेक के ऊपर होता है।

  • अंगूठा म्यूटिंग: रॉक ग्रिप में, निचली स्ट्रिंग्स को हल्का छूकर उनकी ध्वनि रोकें।

  • अंगुली म्यूटिंग: उपयोग नहीं की जाने वाली स्ट्रिंग्स को हल्के से अंगुलियों की पलकों से छूकर अनचाही गूँज रोकें।

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2. बुनियादी स्लैप तकनीक

① थम्पिंग (अंगूठा)

स्ट्रिंग्स को अंगूठे से मारना स्लैप बास का मूल है।

  • स्ट्राइक की स्थिति: चौथी या तीसरी स्ट्रिंग्स के लिए, फ्रंट पिकअप के पास मारें।

  • अंगूठे का कोण: स्ट्रिंग के लगभग लंबवत, लेकिन थोड़े झुके हुए ताकि रिबाउंड आसान हो।

  • रिबाउंड: लगातार थम्प्स के लिए, स्ट्राइक के तुरंत बाद अंगूठा छोड़ें ताकि साफ ध्वनि बने।

  • थम्प-थ्रू तकनीक: थम्पिंग और पॉपिंग को मिलाते समय, अगली पॉप की तैयारी के लिए अंगूठे को अगले स्ट्रिंग की ओर लगातार चलाएँ।

अभ्यास:

  • खुली स्ट्रिंग रिद्म: 4th स्ट्रिंग पर बराबर स्ट्राइक करें (“बॉन बॉन बॉन बॉन”) बीपीएम 60 पर, धीरे-धीरे गति बढ़ाएं।

  • अन्य स्ट्रिंग्स शामिल करें: 4 → 3 → 2 → 1 स्ट्रिंग क्रम में थम्प करें, समान वॉल्यूम बनाए रखें।

② पॉपिंग (खींचना)

सूचक या मध्य अंगुली से स्ट्रिंग को खींचें ताकि यह फ्रेस्टबोर्ड से टकराए।

  • खींचने का कोण: स्ट्रिंग को लगभग लंबवत उठाएं।

  • बल: न्यूनतम बल का उपयोग करें; ज्यादा जोर से ध्वनि दब सकती है।

  • वॉल्यूम: हल्का जोर देकर अभ्यास तकनीक को आरामदायक बनाता है। बहुत हल्का खेलने से अनावश्यक तनाव हो सकता है।

अभ्यास:

  • खुली पहली स्ट्रिंग: क्वार्टर या एट-नोट में पॉप करें, वॉल्यूम समान रखें।

  • थम्पिंग के साथ संयोजन: 4th स्ट्रिंग थम्प और 1st स्ट्रिंग पॉप को वैकल्पिक रूप से खेलें ताकि रिदमिक समझ विकसित हो।

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3. रिद्म-केंद्रित बुनियादी अभ्यास

① मेट्रोनोम का उपयोग

स्लैप बास में रिद्म महत्वपूर्ण है। बीपीएम 60 से शुरू करें, थम्प और पॉप को समान रूप से दोहराएं। धीरे-धीरे छह-ठीक नोट पैटर्न को तेज tempos में अभ्यास करें।

② घोस्ट नोट्स

बाएं हाथ से स्ट्रिंग्स को हल्के से म्यूट करें ताकि तालबद्ध ध्वनि बने।
पैटर्न में अभ्यास करें: “थम्प → घोस्ट नोट → पॉप → घोस्ट नोट”।


4. लागू स्लैप फ्रेज़

① ऑक्टेव फ्रेज़

फ़ंक में सामान्यतः इस्तेमाल होने वाली ऑक्टेव तकनीक लागू करें।
उदाहरण: 3rd स्ट्रिंग, 3rd फ्रेट थम्प → 1st स्ट्रिंग, 5th फ्रेट पॉप बार-बार।

② बाएं हाथ की हिटिंग म्यूट (LHM)

बाएं हाथ से स्ट्रिंग्स को मारकर म्यूटेड ध्वनि उत्पन्न करें। ज्यादा जोर न लगाएं; अन्यथा यह अनचाही हामर-ऑन में बदल सकता है। केवल स्ट्रिंग्स को मारकर साफ “क्लिक” ध्वनि पाने तक अभ्यास करें।

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स्लैप बास का इतिहास और विकास

1. उत्पत्ति: लैरी ग्राहम

लैरी ग्राहम को 1960 के दशक के अंत में स्लैप बास के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है, जब वह अपनी माँ के ऑर्गन बजाने में मदद कर रहे थे। चूंकि ड्रमर नहीं था, उन्होंने रिद्म सेक्शन को बास के साथ कवर करना पड़ा।
उन्होंने दो तकनीकें विकसित कीं:

  • थम्पिंग: अंगूठे से स्ट्रिंग को मारकर बेस-ड्रम जैसी ध्वनि उत्पन्न करना।

  • खींचना: अंगुलियों से स्ट्रिंग खींचकर स्नेयर जैसी ऊँची ध्वनि उत्पन्न करना।

इन तकनीकों का उपयोग करके, ग्राहम ने Sly & the Family Stone और Graham Central Station में फ़ंकी बास लाइन्स स्थापित की।

प्रतिनिधि गीत:

  • Thank You (Falettinme Be Mice Elf Agin) (1969)

  • Hair (1973)

2. विकास: लुईस जॉनसन और मार्कस मिलर

  1. लुईस जॉनसन: The Brothers Johnson के बासिस्ट, उन्होंने थम्प तकनीक को और विकसित किया।

    • Stomp! (1980)

    • माइकल जैक्सन के लिए बास: Billie Jean, Get on the Floor

  2. मार्कस मिलर: 1980 के दशक में स्लैप ने जैज़ फ्यूज़न में प्रवेश किया। उन्होंने घोस्ट नोट्स और हार्मोनिक्स को शामिल कर ग्रूवी बास लाइन्स बनाईं।

    • Run for Cover (1986)

    • Power (1993)

3. उन्नत विकास: विक्टर वूटन और डबल थम्प

  1. डबल थम्प: विक्टर वूटन ने अंगूठे के डाउनस्टोक और अपस्टोक का उपयोग करते हुए तेज और जटिल फ्रेज़ विकसित किए।

  2. टैपिंग और कॉर्ड्स के साथ स्लैप: वूटन ने स्लैप को टैपिंग और कॉर्ड प्ले के साथ मिलाकर गिटार जैसी फ्रेज़ बनाई।

    • Classical Thump (1996)

    • U Can’t Hold No Groove (1996)

4. आधुनिक स्लैप बास

आज स्लैप बास फ़ंक, जैज़, रॉक, मेटल, पॉप आदि में पाया जाता है। तकनीकी बासिस्ट डबल थम्प, पुल, टैपिंग और घोस्ट नोट्स का उपयोग करते हैं।

प्रमुख आधुनिक स्लैप बासिस्ट:


सारांश

  • 1960 के दशक के अंत: लैरी ग्राहम ने ड्रम की जगह स्लैप बास का आविष्कार किया।

  • 1970–80: लुईस जॉनसन और मार्कस मिलर ने स्लैप तकनीक को विकसित किया।

  • 1990 के बाद: विक्टर वूटन ने डबल थम्प और टैपिंग पेश किया।

  • आधुनिक: स्लैप विभिन्न शैलियों में लागू है।

स्लैप बास केवल एक तकनीक नहीं है—इसने बास की भूमिका को बदल दिया, इसे एक लय वाद्य से अधिक अभिव्यक्तिपूर्ण और आक्रामक संगीत वॉइस में बदल दिया।

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